
कोरबा। जिले के दूधिटांगर से लेमरू रोड तक विद्युत लाइन विस्तार के लिए करोड़ों रुपये का ठेका दिए जाने के बाद इन दिनों विद्युत खम्भे और तार लगाने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता, मजदूरों की सुरक्षा और ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे विद्युत खम्भे खड़े करने के दौरान निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मापदंडों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस कार्य पर शासन का बड़ा बजट खर्च हो रहा है, उसमें यदि गुणवत्ता से समझौता हुआ तो आने वाले समय में विद्युत व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ सकता है।
निजी ट्रैक्टर पर CSPDCL का नाम लिखने का आरोप
स्थानीय स्तर पर एक और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि कार्य में लगाए गए निजी ट्रैक्टर पर CSPDCL का नाम लिखा हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है कि संबंधित वाहन विभाग का है या ठेकेदार द्वारा निजी तौर पर लगाया गया है।
यदि निजी वाहन पर विभाग का नाम इस्तेमाल किया जा रहा है तो इसकी वैधता और अनुमति की भी जांच की आवश्यकता है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
बिना सुरक्षा उपकरण के काम कराने का आरोप
काम के दौरान मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा कर्मचारियों से बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरण के विद्युत खम्भों से संबंधित कार्य कराया जा रहा है। ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये के ठेके में यदि मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, तो यह बेहद गंभीर विषय है। विभाग को मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए कि ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
नाबालिग से ट्रैक्टर चलवाने का आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप यह भी है कि ठेकेदार द्वारा कथित तौर पर नाबालिग से ट्रैक्टर चलवाया जा रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो संबंधित विभाग और प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहन और निर्माण कार्य से जुड़े उपकरण चलाना जोखिम भरा होता है। ऐसे में चालक की उम्र, लाइसेंस और योग्यता की जांच होना जरूरी है।
अधिकारी मौके पर नहीं करते निरीक्षण?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये के इस महत्वपूर्ण कार्य की विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निगरानी और निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। यदि अधिकारी समय-समय पर मौके पर पहुंचकर कार्य की गुणवत्ता, खम्भों की स्थापना, सामग्री और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करें तो अनियमितताओं की संभावना कम हो सकती है।
लोगों का कहना है कि CSPDCL के जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर जाकर पूरे कार्य की जांच करनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि ठेकेदार को दिए गए कार्यादेश और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार ही काम हो रहा है या नहीं।
गुणवत्ता से समझौता हुआ तो जिम्मेदार कौन?
विद्युत खम्भे और तार लगाने का काम केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनसुरक्षा से जुड़ा विषय है। खम्भों की मजबूती, जमीन में उनकी गहराई, नींव, सामग्री की गुणवत्ता और तारों की स्थापना में थोड़ी सी भी लापरवाही भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दूधिटांगर से लेमरू मार्ग तक चल रहे विद्युत कार्य की तकनीकी जांच और गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए। साथ ही खम्भों की स्थापना में इस्तेमाल की जा रही सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच किसी सक्षम तकनीकी टीम से कराई जाए।
‘मोटी कमीशन’ के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच
कार्य में कथित मनमानी को लेकर अब कुछ लोगों द्वारा यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि कहीं ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच मिलीभगत या कमीशन का कोई खेल तो नहीं है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
ऐसे में आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि जांच में किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही, मिलीभगत अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
दूधिटांगर–लेमरू मार्ग पर चल रहे इस विद्युत कार्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब निगाहें CSPDCL के अधिकारियों और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या अधिकारी मौके पर निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करेंगे? क्या मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैक्टर चालक की उम्र एवं लाइसेंस की जांच होगी? और क्या निजी वाहन पर विभाग का नाम लिखे जाने के मामले में स्थिति स्पष्ट की जाएगी?
इन सभी सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल स्थानीय लोगों ने मांग की है कि करोड़ों रुपये के इस कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

