--:--
Home Uncategorized कटघोरा में तालाब विकास के टेंडर पर उठे सवाल, 50.77 लाख के काम में दोबारा निविदा प्रक्रिया से शासन को लाखों के नुकसान का आरोप

कटघोरा में तालाब विकास के टेंडर पर उठे सवाल, 50.77 लाख के काम में दोबारा निविदा प्रक्रिया से शासन को लाखों के नुकसान का आरोप

by shriwashkchandra@gmail.com
49 views


कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा के वार्ड क्रमांक 4 स्थित तालाब के उन्नयन कार्य को लेकर टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अधोसंरचना मद से प्रस्तावित इस कार्य की अनुमानित लागत करीब 50.77 लाख रुपये बताई जा रही है। आरोप है कि पहली निविदा प्रक्रिया में बड़ी संख्या में ठेकेदारों के शामिल होने के बावजूद प्रक्रिया को निरस्त कर दोबारा टेंडर जारी किया गया, जिसके बाद काम अपेक्षाकृत अधिक दर पर दिए जाने से शासन को करीब 15 से 17 लाख रुपये के संभावित नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

पहली निविदा में 17 वेंडरों ने लिया था हिस्सा


जानकारी के अनुसार तालाब उन्नयन कार्य के लिए पहली बार निविदा जारी की गई थी, जिसमें करीब 17 निविदाकर्ताओं ने भाग लिया। इस प्रक्रिया में दो निविदाकर्ताओं द्वारा लगभग 25 प्रतिशत कम दर (Below) पर निविदा प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई।
बताया जा रहा है कि इनमें से एक निविदाकर्ता ने दूसरे निविदाकर्ता के पक्ष में सहमति भी दी थी। इसके बावजूद पूरी निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया। इसी निर्णय को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि जब निविदा में प्रतिस्पर्धी दरें सामने आ रही थीं, तो पूरी प्रक्रिया को निरस्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?


कुछ दिनों बाद दोबारा निकाला गया टेंडर


पहली निविदा निरस्त होने के कुछ समय बाद नगर पालिका परिषद द्वारा इसी कार्य के लिए दोबारा निविदा जारी की गई। इस बार सात निविदाकर्ताओं ने हिस्सा लिया। आरोप है कि इनमें से छह निविदाकर्ताओं ने अपनी निविदा वापस ले ली और अंततः केवल एक निविदाकर्ता की निविदा बची।
इसके बाद उक्त कार्य को करीब 5 प्रतिशत एबव (Above) दर पर दिए जाने की बात सामने आई है। इसी को लेकर स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि पहली निविदा में यदि करीब 25 प्रतिशत कम दर पर काम मिलने की स्थिति थी और दूसरी प्रक्रिया में करीब 5 प्रतिशत अधिक दर पर कार्य दिया गया, तो दोनों प्रक्रियाओं के बीच शासन को होने वाले वित्तीय अंतर की जांच क्यों नहीं की जा रही है?
स्थानीय स्तर पर इस अंतर को करीब 15 से 17 लाख रुपये बताया जा रहा है। हालांकि वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना हुआ, यह संबंधित निविदा दस्तावेज, स्वीकृत दर, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन तथा कार्यादेश की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


PIC को लेकर भी उठे सवाल


पूरे मामले में PIC (प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल) की भूमिका को लेकर भी विरोधाभासी जानकारी सामने आने का दावा किया जा रहा है।
नगर पालिका के इंजीनियर राम का कहना बताया जा रहा है कि पहली निविदा को PIC मेंबर के माध्यम से निरस्त किया गया था। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या PIC को करीब 30 लाख रुपये तक की निविदा निरस्त करने का अधिकार है, तो उनके बयान में बदलाव नजर आया और उन्होंने बताया कि निविदा को सामान्य सभा में निरस्त किया गया था।
यही विरोधाभास अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को और मजबूत करता है। सवाल यह है कि आखिर पहली निविदा को किस सक्षम प्राधिकारी ने, किस प्रस्ताव और किस नियम के तहत निरस्त किया? क्या इसका बाकायदा प्रस्ताव पारित हुआ था? क्या निविदा निरस्त करने के कारणों को रिकॉर्ड में दर्ज किया गया? और क्या दूसरी निविदा जारी करने से पहले पहली प्रक्रिया के निरस्तीकरण की पूरी जानकारी सार्वजनिक की गई?
CMO से जानकारी लेने का प्रयास, जवाब देने से बचने का आरोप
मामले को लेकर कटघोरा नगर पालिका परिषद के CMO मुद्रीका प्रसाद तिवारी से जानकारी लेने का प्रयास किया गया। आरोप है कि CMO मीडिया के सवालों से बचते नजर आए और मामले से जुड़ी स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि पूरी निविदा प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है तो उसके दस्तावेज, निरस्तीकरण का कारण, PIC अथवा सामान्य सभा का प्रस्ताव और दूसरी निविदा में कार्यादेश की जानकारी सार्वजनिक करने में परेशानी क्यों होनी चाहिए?


किन बिंदुओं की जांच जरूरी?


इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के दौरान मुख्य रूप से इन बिंदुओं को देखा जाना चाहिए—
पहली निविदा में शामिल सभी 17 निविदाकर्ताओं की दरें क्या थीं?
दो निविदाकर्ताओं द्वारा लगभग 25 प्रतिशत Below दर किस आधार पर दी गई थी?
पहली निविदा को निरस्त करने का लिखित कारण क्या था?
निविदा निरस्त करने का अधिकार किस समिति अथवा सक्षम अधिकारी के पास था?
क्या PIC की बैठक में निविदा निरस्तीकरण का प्रस्ताव पारित हुआ था?
यदि सामान्य सभा ने निविदा निरस्त की तो उसका प्रस्ताव क्रमांक और दिनांक क्या है?
दूसरी निविदा में सात निविदाकर्ताओं की दरें क्या थीं?
छह निविदाकर्ताओं द्वारा निविदा वापस लेने का कारण क्या था?
एकमात्र निविदाकर्ता को 5 प्रतिशत Above पर कार्य देने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?
पहली और दूसरी निविदा की दरों की तुलना करने पर शासन को वास्तविक वित्तीय अंतर कितना पड़ा?
क्या पूरी प्रक्रिया में शासन के वित्तीय हितों को ध्यान में रखा गया?
जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा सच
तालाब उन्नयन जैसे विकास कार्य जनता के पैसे से होते हैं। इसलिए निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पहली निविदा में कम दर पर कार्य मिलने की स्थिति थी और बाद में प्रक्रिया निरस्त कर अधिक दर पर कार्य दिया गया, तो इसके कारणों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
हालांकि शासन को 15 से 17 लाख रुपये का नुकसान हुआ है या नहीं, यह अभी आरोप/आशंका के स्तर पर है। इसकी पुष्टि संबंधित टेंडर फाइल, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति, निविदा तुलनात्मक पत्रक (Comparative Statement), PIC/सामान्य सभा के प्रस्ताव और कार्यादेश की जांच के बाद ही हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन इस मामले में दस्तावेजों की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं। यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमसम्मत है तो संबंधित अधिकारी दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। वहीं यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है, तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ सकती है।

You may also like

Contact Us

chandra kumar shriwas

संपादक – चन्द्र कुमार श्रीवास

संपर्क – 6261299296

ईमेल -shriwaskchandra@gmail.com

पता – बांकी मोंगरा, कोरबा, छत्तीसगढ़

Udhyam No : UDYAM-CG-10-0033758

Important Links

All Rights Reserved © 2026 Manas News Chhattisgarh