
कोरबा/बांकी मोंगरा। कोरबा जिले में राखड़ परिवहन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बांकी मोंगरा से कटघोरा जाने वाले मार्ग पर शुक्लाखार के पास सड़क किनारे राखड़ डंप किए जाने का मामला सामने आया है। सड़क किनारे पड़े राखड़ को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि राखड़ परिवहन में लगे वाहनों के लिए नियम-कायदे कोई मायने नहीं रखते।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राखड़ परिवहन के दौरान वाहनों द्वारा निर्धारित स्थान तक राखड़ पहुंचाने के बजाय जहां मन हुआ, वहीं राखड़ गिरा दिया जा रहा है। इससे सड़क की स्थिति प्रभावित होने के साथ-साथ राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क है या राखड़ डंपिंग यार्ड?
बांकी मोंगरा से कटघोरा जाने वाला मार्ग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सड़क है। इसी मार्ग पर शुक्लाखार के पास सड़क किनारे राखड़ का ढेर नजर आ रहा है। सवाल यह है कि आखिर सड़क किनारे राखड़ किसके आदेश या अनुमति से डंप किया गया?
यदि राखड़ परिवहन करने वाले वाहनों को किसी निर्धारित स्थान पर राखड़ खाली करना है, तो फिर सड़क किनारे राखड़ कैसे पहुंच गया? क्या परिवहन में लगे वाहनों की निगरानी नहीं होती? या फिर संबंधित विभाग और परिवहनकर्ता की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखा जा रहा है?
NTPC का राखड़ या CSEB का?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि शुक्लाखार के पास सड़क पर डंप किया गया राखड़ आखिर किस पावर प्लांट का है—NTPC का या CSEB का? इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। राखड़ के स्रोत और उसे वहां डंप करने वाले वाहन की जांच होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
प्रशासन करे जांच, जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करे और सड़क किनारे डंप किए गए राखड़ की जांच कराए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि राखड़ लेकर कौन-कौन से वाहन इस मार्ग से गुजर रहे हैं और उन्हें राखड़ खाली करने के लिए कौन सा स्थान निर्धारित किया गया है।
अगर बिना अनुमति सड़क किनारे राखड़ डंप किया गया है, तो संबंधित वाहन मालिक, ट्रांसपोर्टर और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सड़क किनारे राखड़ डंप करने वालों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी जिम्मेदार विभागों की चुप्पी के बीच दबकर रह जाएगा।
