
कोरबा। राखी पर्व से पहले पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के दो स्कूलों में ताला लटका मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल बंद कर शिक्षक अपने घर चले गए, जबकि उन्हें पूरा वेतन चाहिए। घटना ने क्षेत्र की सरकारी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि दोनों स्कूलों में निर्धारित समय के दौरान ताला लगा मिला। स्कूल पहुंचने वाले बच्चों और ग्रामीणों को वापस लौटना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिक्षक स्कूल में उपस्थित नहीं हैं और स्कूल पर ताला लगा है, तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी और शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी कौन कर रहा है?
BRC को जानकारी नहीं, BEO भी अनजान
मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जब जवाबदेही को लेकर सवाल उठे तो बताया गया कि BRC स्तर पर भी घटना की जानकारी नहीं थी और BEO को भी इसकी जानकारी नहीं होने की बात सामने आई। ऐसे में विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने दोनों शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग इस मामले में वास्तव में क्या कदम उठाता है।
पूरा वेतन या जवाबदेही?
सरकारी स्कूलों में शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने के लिए नियुक्त होते हैं। इसके बदले उन्हें नियमित वेतन मिलता है। लेकिन यदि स्कूल बंद कर शिक्षक चले जाएं और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो, तो उनकी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल में ताला लगाकर चले जाने की हिमाकत आखिर किसके भरोसे पर की गई? क्या शिक्षकों को विभागीय कार्रवाई का कोई भय नहीं है? यदि ऐसे मामलों में सिर्फ नोटिस जारी कर मामला खत्म कर दिया गया, तो भविष्य में भी ऐसी लापरवाही दोहराए जाने की आशंका बनी रहेगी।
अब कार्रवाई पर टिकी नजर
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है। क्या केवल नोटिस जारी कर खानापूर्ति की जाएगी? क्या एक दिन का वेतन काटकर मामला खत्म कर दिया जाएगा? या फिर विभाग स्कूल बंद रखने और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित करने की गंभीरता को देखते हुए कड़ी कार्रवाई करेगा?
राखी जैसे त्योहार से ठीक पहले सामने आए इस मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर विभागीय कार्रवाई पर है। शिक्षा के मंदिर में ताला लगाने वालों पर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या जिम्मेदारी तय कर ठोस कदम उठाया जाता है—यह आने वाला समय बताएगा।
नोट: शिक्षकों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित शिक्षकों का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है। निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए विभाग और संबंधित शिक्षकों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।
