
कोरबा। एसईसीएल गेवरा क्षेत्र की खदान में एक पे-लोडर में भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि 70203 नंबर का पे-लोडर शेल पत्थर उठाव के कार्य में लगा हुआ था, इसी दौरान अचानक उसमें आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते पे-लोडर आग की चपेट में आ गया और मशीन को भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। घटना के बाद क्षतिग्रस्त पे-लोडर को SECL के लक्ष्मण वर्कशॉप में खड़ा किए जाने की जानकारी मिल रही है।l
रखरखाव व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इस घटना ने गेवरा खदान में भारी मशीनों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि यदि मशीनों का नियमित तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव समय पर किया जाता तो ऐसी घटना को रोका जा सकता था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पे-लोडर जैसी भारी मशीनें खदान के उत्पादन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में मशीन में आग लगने की घटना न केवल आर्थिक नुकसान का विषय है, बल्कि खदान में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
करीब दो करोड़ रुपये के नुकसान की चर्चा
सूत्रों के हवाले से मशीन की क्षति से SECL गेवरा प्रबंधन को करीब दो करोड़ रुपये के नुकसान की चर्चा है। हालांकि वास्तविक आर्थिक नुकसान कितना हुआ है, इसकी पुष्टि कंपनी की तकनीकी जांच और मूल्यांकन के बाद ही हो सकेगी।
घटना को दबाने के प्रयास का आरोप
घटना को लेकर यह भी आरोप सामने आ रहा है कि SECL गेवरा के कुछ अधिकारी मामले को सार्वजनिक होने से रोकने अथवा दबाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो यह गंभीर विषय है। इतनी बड़ी मशीन में आग लगने की घटना की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक कारण और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
जांच से सामने आ सकता है सच
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पे-लोडर में आग आखिर किन परिस्थितियों में लगी? क्या मशीन का नियमित मेंटेनेंस किया जा रहा था? क्या घटना से पहले मशीन में किसी तकनीकी खराबी के संकेत मिले थे? और यदि शॉर्ट सर्किट ही आग का कारण था तो विद्युत एवं तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई?
घटना की तकनीकी जांच, मशीन के मेंटेनेंस रिकॉर्ड की जांच और संबंधित कर्मचारियों के बयान से पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
SECL प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही नुकसान और आग लगने के वास्तविक कारणों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
