
कोरबा/बांकी मोंगरा। कोरबा जिले के बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि एक ही निकाय में करीब तीन वर्षों से पदस्थ रहने के कारण अधिकारी की कार्यशैली में मनमानी बढ़ गई है। कर्मचारियों के साथ व्यवहार, प्रशासनिक निर्णयों और ठेकेदारों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने के आरोपों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
नगर पालिका जैसे स्थानीय निकाय में अधिकारी की जिम्मेदारी केवल सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों का संचालन करना ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के साथ समन्वय स्थापित करना, जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम करना और जनता के धन का पारदर्शी तरीके से उपयोग सुनिश्चित करना भी है। लेकिन बांकी मोंगरा नगर पालिका को लेकर सामने आ रही शिकायतें इन जिम्मेदारियों के निर्वहन पर सवाल खड़े कर रही हैं।
तीन साल से एक ही जगह पदस्थापना, क्या बढ़ गया अधिकारियों का मनोबल?
स्थानीय निकायों में अधिकारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण प्रशासनिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है। लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने वाले अधिकारी के अनुभव से निकाय को लाभ मिल सकता है, लेकिन यदि कार्यशैली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आएं, तो उनकी समीक्षा भी जरूरी हो जाती है।
बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में CMO की करीब तीन वर्षों की पदस्थापना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि क्या लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहने से प्रशासनिक जवाबदेही कमजोर पड़ रही है? क्या कर्मचारियों की शिकायतों और कार्यस्थल पर उनके साथ होने वाले व्यवहार की समीक्षा की जा रही है?
हालांकि, इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए। केवल लंबे समय तक पदस्थ रहने के आधार पर किसी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
अधीनस्थ कर्मचारियों से व्यवहार पर उठे सवाल
नगर पालिका के कामकाज में कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। सफाई व्यवस्था से लेकर राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों और अन्य नागरिक सुविधाओं तक, प्रत्येक विभाग के कर्मचारी निकाय की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में योगदान देते हैं।
ऐसे में कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और उनकी समस्याओं को सुनना प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
आरोप है कि बांकी मोंगरा नगर पालिका में कुछ कर्मचारियों को अपनी बात रखने और अपने अधिकारों से जुड़ी समस्याएं उठाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कर्मचारियों के बीच ऐसी धारणा बनने की बात कही जा रही है कि यदि कोई कर्मचारी अपने हक या कार्यस्थल से जुड़ी समस्या को लेकर आवाज उठाता है, तो उसे प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल कार्यस्थल के माहौल का मामला नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है।
सवाल यह है कि क्या नगर पालिका में कर्मचारियों को अपनी समस्याएं रखने की पूरी स्वतंत्रता है? क्या शिकायत करने वाले कर्मचारियों को निष्पक्ष सुनवाई मिलती है? इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
अपने हक की बात करना क्या कर्मचारियों के लिए पड़ सकता है भारी?
किसी भी सरकारी निकाय में कर्मचारियों को नियमानुसार अपनी समस्याएं रखने, सेवा संबंधी शिकायत करने और कार्यस्थल पर उचित व्यवहार की अपेक्षा करने का अधिकार है।
यदि किसी कर्मचारी को अपनी बात रखने के कारण काम से हटाए जाने, प्रताड़ित किए जाने या किसी अन्य प्रकार की कार्रवाई का डर महसूस होता है, तो ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बांकी मोंगरा नगर पालिका को लेकर उठ रहे आरोपों के बीच यह जानना जरूरी है कि क्या कर्मचारियों के लिए कोई प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था है? क्या कर्मचारियों की समस्याओं को लिखित रूप में दर्ज कर उनका निराकरण किया जाता है? और क्या उच्च अधिकारी समय-समय पर कर्मचारियों से सीधे संवाद करते हैं?
इन सवालों के जवाब मिलने से न केवल कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि नगर पालिका के कामकाज में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप, जांच की मांग
नगर पालिका परिषद में निर्माण कार्यों, सामग्री खरीदी और अन्य विकास कार्यों में सरकारी धन खर्च किया जाता है। इसलिए इन कार्यों में पारदर्शिता, नियमानुसार निविदा प्रक्रिया और गुणवत्ता की निगरानी बेहद जरूरी है।
CMO की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों में ठेकेदारों को कथित रूप से लाभ पहुंचाने के आरोप भी शामिल हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी विशेष ठेकेदार, कार्यादेश या वित्तीय अनियमितता के प्रमाण सामने आए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
फिर भी, यदि ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने की शिकायतें हैं, तो संबंधित कार्यों की निविदा प्रक्रिया, स्वीकृति, कार्यादेश, भुगतान और गुणवत्ता की जांच कराई जानी चाहिए।
जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि सभी ठेकेदारों को नियमों के अनुसार समान अवसर मिले या नहीं, कार्यों का आवंटन निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुआ या नहीं और भुगतान वास्तविक कार्य की गुणवत्ता एवं प्रगति के अनुरूप किया गया या नहीं।
आखिर नगर पालिका के विकास कार्यों में नियमों का पालन सर्वोपरि है या किसी की पसंद-नापसंद? यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही सामने आ सकता है।
CMO के साथ PIC और उच्च अधिकारियों की जवाबदेही भी जरूरी
नगर पालिका परिषद के कामकाज में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के साथ-साथ संबंधित विषयों पर निर्णय लेने वाले जनप्रतिनिधियों और अन्य सक्षम अधिकारियों की भी भूमिका होती है। इसलिए किसी भी निर्णय को लेकर सवाल उठने पर पूरी प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है।
क्या नगर पालिका के कार्यों की नियमित समीक्षा हो रही है? क्या कर्मचारियों की शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंच रही हैं? क्या निर्माण कार्यों और खरीदी से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाती है? और क्या निकाय के कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं?
इन सवालों पर नगर पालिका प्रशासन, संबंधित जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारियों की शिकायतों, प्रशासनिक व्यवहार और ठेकेदारों से संबंधित आरोपों की निष्पक्ष समीक्षा कराए।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं मिलते हैं, तो वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि अनावश्यक विवाद की स्थिति न बने।
अब CMO के जवाब का इंतजार
बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में करीब तीन वर्षों से पदस्थ CMO की कार्यशैली को लेकर उठ रहे सवालों पर अब संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना जरूरी है। कर्मचारियों के साथ व्यवहार, शिकायतों के निराकरण और ठेकेदारों से जुड़े आरोपों पर प्रशासन को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बांकी मोंगरा नगर पालिका में प्रशासनिक व्यवस्था नियमों और पारदर्शिता के आधार पर संचालित हो रही है, या कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के लिए व्यवस्था में सुधार की जरूरत है?
