जशपुर से आए कर्मचारियों को अधिक छूट देने का दावा, स्वच्छता दीदियों ने लगाया अधिक समय तक काम कराने और धमकी देने का आरोप
कोरबा/बांकी मोंगरा। बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में सफाई व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के बीच कथित भेदभाव और कामकाज में असमानता का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका में कार्यरत स्थानीय सफाई कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जशपुर से बुलाए गए सफाई कर्मचारियों को कथित तौर पर अधिक छूट दी जा रही है, जबकि स्थानीय कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों से ज्यादा समय तक काम लिया जाता है। यदि ये आरोप सही हैं, तो नगर पालिका की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जशपुर से आए कर्मचारियों और स्थानीय कर्मियों के लिए अलग-अलग नियम?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में जशपुर से आए सफाई कर्मचारियों को कथित तौर पर दोपहर 12 बजे या 1 बजे तक छुट्टी दे दी जाती है। वहीं, स्थानीय सफाई कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों के लिए काम समाप्त करने का कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं होने की शिकायत सामने आई है।
स्थानीय कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे निर्धारित समय से अधिक काम लिया जाता है, जबकि दूसरे कर्मचारियों को अपेक्षाकृत जल्दी छुट्टी मिल जाती है। इससे कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। नगर पालिका में सभी कर्मचारियों की ड्यूटी का समय, कार्य आवंटन और छुट्टी संबंधी नियमों की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सेल्फी के नाम पर भी भेदभाव का आरोप
नगर पालिका की सफाई व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों को लेकर एक और शिकायत सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय सफाई कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों को अपनी ड्यूटी का प्रमाण देने के लिए सेल्फी लेने जैसी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है, जबकि जशपुर से आए कर्मचारियों को कथित तौर पर बिना सेल्फी के ही छुट्टी दे दी जाती है।
यदि कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जा रहे हैं, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर एक ही नगर पालिका में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समान व्यवस्था क्यों नहीं है? क्या सभी कर्मचारियों के लिए ड्यूटी की उपस्थिति, कार्य की निगरानी और छुट्टी के नियम समान रूप से लागू किए जा रहे हैं? इन सवालों पर नगर पालिका प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
रिक्शा खराब होने पर मरम्मत का खर्च खुद उठाने की शिकायत
स्वच्छता दीदियों की परेशानियां केवल काम के समय तक सीमित नहीं बताई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ स्वच्छता दीदियों का कहना है कि सफाई कार्य में इस्तेमाल होने वाली रिक्शा खराब होने पर उन्हें अपने खर्च से मरम्मत करानी पड़ती है।
यदि कर्मचारियों को नगर पालिका के सफाई कार्य के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों की मरम्मत का खर्च स्वयं उठाना पड़ रहा है, तो यह जांच का विषय है कि उपकरणों के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है और इसके लिए नगर पालिका में क्या व्यवस्था निर्धारित है।
नगर पालिका प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट करना चाहिए कि सफाई कार्य में इस्तेमाल होने वाले रिक्शा और अन्य उपकरणों की मरम्मत के लिए बजट अथवा कोई निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध है या नहीं।
आवाज उठाने पर काम से हटाने की धमकी देने का आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कार्यप्रणाली को लेकर लगाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, स्वच्छता दीदियों और सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें काम से बैठा देने यानी काम से हटाने की धमकी दिए जाने की बात कही जाती है।
एक कर्मचारी के संबंध में यह भी दावा किया जा रहा है कि जब उसने अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाई, तो उसे काम से निकाल दिया गया।
बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद के गठन से पहले से ही क्षेत्र में साफ-सफाई का कार्य करते हुए अपनी सेवाएं देता आ रहा था। ऐसे में यदि केवल अपनी समस्या उठाने के कारण किसी कर्मचारी को काम से हटाया गया है, तो यह गंभीर मामला है। हालांकि, कर्मचारी को हटाने के वास्तविक कारण, उसकी नियुक्ति की स्थिति और संबंधित आदेश की जांच के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
वर्षों से सेवा देने वाले कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल
स्थानीय सफाई कर्मचारी और स्वच्छता दीदियां नगर की स्वच्छता व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। शहर की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने में उनकी भूमिका अहम है। ऐसे में उनके बीच भेदभाव की शिकायतें सामने आना नगर पालिका प्रशासन के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।
यदि एक ही व्यवस्था के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ड्यूटी का समय, छुट्टी और अन्य सुविधाओं के नियम अलग-अलग हैं, तो प्रशासन को इसका आधार सार्वजनिक करना चाहिए। साथ ही, लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की शिकायतों को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
CMO और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर उठे सवाल
बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में सामने आ रही इन शिकायतों के बाद अब सवाल उठता है कि कर्मचारियों के लिए समान कार्य व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या नगर पालिका प्रशासन ने कर्मचारियों की शिकायतों की जांच कराई है? क्या सभी कर्मचारियों की उपस्थिति, ड्यूटी के समय और छुट्टी की व्यवस्था का कोई स्पष्ट नियम है? और यदि किसी कर्मचारी को काम से हटाया गया है, तो उसके पीछे क्या कारण रहा?
इन सभी बिंदुओं पर नगर पालिका के CMO और संबंधित जनप्रतिनिधियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों के बीच फैले असंतोष को दूर किया जा सके और नगर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो।
फिलहाल, सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
बांकी मोंगरा नगर पालिका में सफाई कर्मचारियों के साथ भेदभाव के आरोप, स्थानीय कर्मचारियों ने उठाए सवाल
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