कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा नगर निगम क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने स्वच्छता व्यवस्था और सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि कचरे से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली में स्वच्छता दीदियां बैठकर सफर करती नजर आईं। जिस ट्रॉली का इस्तेमाल कचरे को डंपिंग स्थल तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था, उसी में कचरे के बीच बैठकर महिलाओं को यात्रा करते देखना कई सवाल खड़े करता है।
कचरे के बीच सफर, स्वास्थ्य पर पड़ सकता है बुरा असर
स्वच्छता दीदियां शहर की साफ-सफाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे प्रतिदिन कचरा संग्रहण और स्वच्छता से जुड़े कार्यों में योगदान देती हैं। लेकिन यदि उन्हीं कर्मचारियों को कचरे से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली में बैठाकर ले जाया जा रहा है, तो यह उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
कचरे में मौजूद गंदगी, धूल, दुर्गंध और संभावित रूप से हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्वच्छता दीदियों को कार्यस्थल तक आने-जाने के लिए सुरक्षित परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है?
निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस तस्वीर के सामने आने के बाद नगर निगम की व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि कचरे के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली ट्रॉली में ही महिला सफाई कर्मचारियों को बैठाकर ले जाया जा रहा है, तो इसकी अनुमति किसने दी? क्या कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है? और क्या इस तरह के परिवहन को रोकने के लिए कोई निगरानी व्यवस्था मौजूद है?
हालांकि, इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और घटना से जुड़ी परिस्थितियां सामने आना अभी आवश्यक है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कर्मचारियों को किन परिस्थितियों में ट्रॉली में बैठना पड़ा और क्या उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध थी।
स्वच्छता दीदियों की गरिमा और सुरक्षा का सवाल
शहर को स्वच्छ रखने में जुटी स्वच्छता दीदियों का काम बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनकी सुरक्षा, सम्मान और बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखना संबंधित निकाय की जिम्मेदारी है। कचरे के ढेर के बीच बैठकर सफर करने की तस्वीर यदि सामने आई है, तो यह व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करती है।
सफाई कर्मचारियों से काम लेने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और सुरक्षित आवागमन को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। केवल शहर की स्वच्छता की बात करना पर्याप्त नहीं, बल्कि स्वच्छता बनाए रखने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोरबा नगर निगम प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या घटना की जांच कराई जाएगी? क्या स्वच्छता दीदियों के लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी? और यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
फिलहाल, इस मामले में नगर निगम प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
सवाल सीधा है—शहर को स्वच्छ रखने वाली स्वच्छता दीदियों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
