
कोरबा। जिले में जुए के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बावजूद जुआरियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कोरबा जिला अंतर्गत ग्राम गोढ़ी के चाकामार जंगल में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर बावनपरी का खेल संचालित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यहां जुआ खेलने के लिए दीगर जिलों से भी खिलाड़ी पहुंच रहे हैं।
सुबह से शाम और रातभर चलने का दावा
सूत्रों का दावा है कि चाकामार जंगल में जुए के फड़ के लिए बाकायदा समय निर्धारित किया गया है। कथित तौर पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक एक समय में खेल चलता है, जबकि इसके बाद रात करीब 11 बजे से सुबह तक दूसरी शिफ्ट में जुआ संचालित होने की बात सामने आ रही है।
अगर यह दावा सही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इतने लंबे समय तक कथित तौर पर चल रहे इस फड़ की जानकारी पुलिस तक क्यों नहीं पहुंच रही?
दीगर जिलों से पहुंच रहे खिलाड़ी?
बताया जा रहा है कि कथित जुआ फड़ में स्थानीय जुआरियों के अलावा दूसरे जिलों से भी खिलाड़ी पहुंच रहे हैं। बड़े दांव लगाए जाने की चर्चाओं के बीच सवाल यह भी उठ रहा है कि जंगल के अंदर इतनी बड़ी गतिविधि आखिर किसके संरक्षण या सहारे पर चल रही है?
कौन है फड़ का संचालक?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस कथित बड़े जुआ फड़ के पीछे कौन है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है या फिर स्थानीय स्तर पर किसी की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है? हालांकि इन सवालों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
यदि गोढ़ी के चाकामार जंगल में वास्तव में नियमित रूप से इतना बड़ा जुआ फड़ संचालित हो रहा है, तो पुलिस की निगरानी और मुखबिर तंत्र पर भी सवाल खड़े होते हैं। खासकर तब, जब कथित तौर पर जुआरियों के आने-जाने और खेलने के लिए समय तक निर्धारित होने की बात कही जा रही है।
अब देखना होगा कि कोरबा पुलिस इन दावों की जांच कर चाकामार जंगल में दबिश देती है या नहीं। यदि यहां जुआ संचालित होना पाया जाता है तो पुलिस को फड़ संचालकों और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल—चाकामार जंगल में कथित तौर पर सज रहे इस बड़े फड़ का असली संचालक कौन है और किसके संरक्षण में यह खेल चल रहा है?

