
कोरबा। कोरबा जिले में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जुए का खेल संचालित होने की खबर सामने आ रही है। ग्राम गोढ़ी के चाकामार जंगल में कथित रूप से बावनपरी का बड़ा फड़ सजने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार यहां जुआ खेलने पहुंचने वाले लोगों से करीब ₹1 हजार एंट्री फीस लिए जाने की बात सामने आई है। एंट्री फीस देने के बाद ही खिलाड़ियों को फड़ में प्रवेश मिलने का दावा किया जा रहा है।
दो शिफ्ट में जुआ चलने का दावा
सूत्रों के मुताबिक चाकामार जंगल में कथित जुआ फड़ के लिए बाकायदा समय निर्धारित किया गया है। बताया जा रहा है कि पहली शिफ्ट सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक और दूसरी शिफ्ट रात 11 बजे से सुबह तक चलती है।
अगर यह दावा सही है तो यह सामान्य स्तर का जुआ नहीं, बल्कि लंबे समय तक संचालित होने वाली गतिविधि होने की आशंका पैदा करता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दीगर जिलों से पहुंच रहे खिलाड़ी?
सूत्रों का कहना है कि कथित फड़ में केवल स्थानीय जुआरी ही नहीं, बल्कि दीगर जिलों से भी खिलाड़ी पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने और बड़े दांव लगाए जाने की चर्चाओं ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
एंट्री के नाम पर ही यदि प्रत्येक व्यक्ति से ₹1 हजार लिए जाने की बात सही है, तो सवाल उठता है कि इस कथित फड़ से रोजाना कितना पैसा इकट्ठा हो रहा है और इस पूरी व्यवस्था को कौन संचालित कर रहा है?
जंगल के अंदर कौन चला रहा है फड़?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल फड़ के संचालक और कथित संरक्षण को लेकर है। आखिर जंगल के अंदर इतनी बड़ी गतिविधि कौन संचालित कर रहा है? एंट्री फीस कौन वसूल रहा है? खिलाड़ियों को समय और स्थान की जानकारी कौन दे रहा है?
क्या स्थानीय स्तर पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है या फिर किसी अन्य नेटवर्क के जरिए यह कथित फड़ संचालित हो रहा है—यह जांच का विषय है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
यदि चाकामार जंगल में नियमित रूप से कथित जुआ फड़ संचालित हो रहा है और वहां दूसरे जिलों से भी खिलाड़ी पहुंच रहे हैं, तो पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है—₹1 हजार एंट्री फीस लेकर कथित तौर पर चल रहे इस बड़े फड़ का संचालक कौन है और आखिर किसके दम पर चाकामार जंगल में बावनपरी का खेल चल रहा है?
नोट: ₹1 हजार एंट्री फीस, दो शिफ्ट में संचालन और दीगर जिलों से खिलाड़ियों के पहुंचने संबंधी बातें स्थानीय सूत्रों के दावों पर आधारित हैं; संबंधित पक्ष/पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

