
लगभग 2.35 लाख रुपये की खरीदी का मामला, 5 अक्टूबर की PIC बैठक में दर स्वीकृति के लिए रखे गए प्रस्ताव और कार्यादेश जारी होने की तारीख की जांच की मांग
बांकी मोंगरा, कोरबा। बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में रेनकोट खरीदी का मामला अब सवालों के घेरे में आता दिखाई दे रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नगर पालिका परिषद द्वारा 208 रेनकोट की खरीदी के लिए लगभग 2 लाख 35 हजार रुपये की राशि से संबंधित प्रक्रिया अपनाई गई है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बारिश का मौसम लगभग गुजर चुका था, तब रेनकोट खरीदी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई? आखिर खरीदी की स्वीकृति किस आधार पर दी गई और कार्यादेश कब जारी किया गया?
इस पूरे मामले में नगर पालिका परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ज्योत्सना टोप्पो और प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल (PIC) की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, खरीदी में भ्रष्टाचार या सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के बाद ही हो सकती है।
5 अक्टूबर की PIC बैठक में क्या हुआ था?
मिली जानकारी के अनुसार, 5 अक्टूबर को आयोजित PIC की बैठक में 208 रेनकोट की खरीदी के लिए दर स्वीकृति का विषय सामने आया था। बताया जा रहा है कि इस खरीदी के लिए लगभग 2 लाख 35 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई थी।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि 5 अक्टूबर की बैठक में रेनकोट खरीदी के संबंध में वास्तव में कौन-सा प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था? क्या बैठक में केवल दर स्वीकृति दी गई थी या खरीदी से संबंधित अन्य प्रक्रियाओं को भी मंजूरी प्रदान की गई थी?
बैठक की कार्यवाही रजिस्टर, प्रस्ताव की प्रति, दर स्वीकृति संबंधी दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों के अनुमोदन की जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बारिश बीतने के बाद रेनकोट खरीदी की जरूरत क्यों?
नगर पालिका परिषद में कार्यरत सफाई कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों को बारिश के दौरान काम करने में सुविधा देने के उद्देश्य से रेनकोट खरीदे जाने की बात सामने आ रही है। यदि खरीदी का उद्देश्य कर्मचारियों को बारिश से बचाव के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना था, तो सवाल उठता है कि इसकी प्रक्रिया समय रहते पूरी क्यों नहीं की गई।
क्या रेनकोट की आवश्यकता का आकलन पहले किया गया था? क्या खरीदी के लिए प्रस्ताव समय पर तैयार किया गया था? यदि प्रस्ताव पहले से तैयार था, तो इसकी स्वीकृति और कार्यादेश जारी करने में देरी क्यों हुई?
इन सवालों का जवाब नगर पालिका प्रशासन को दस्तावेजों के साथ देना चाहिए, ताकि जनता के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
कार्यादेश कब जारी हुआ? सामने आनी चाहिए पूरी जानकारी
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कार्यादेश जारी होने की तारीख है। क्या 5 अक्टूबर की PIC बैठक के बाद कार्यादेश जारी किया गया? यदि हां, तो किस तारीख को और किस अधिकारी के अनुमोदन से?
इसके अलावा, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित फर्म को कार्यादेश जारी किया जा चुका है या खरीदी की प्रक्रिया अभी लंबित है। रेनकोट की आपूर्ति हुई है या नहीं, भुगतान किया गया है या नहीं और यदि भुगतान हुआ है तो किस आधार पर किया गया है—इन सभी बिंदुओं की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
यदि अभी तक खरीदी पूरी नहीं हुई है, तो प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वर्तमान परिस्थितियों में इस खरीदी की आवश्यकता और समयबद्धता का आकलन किस आधार पर किया गया।
जनता के टैक्स के पैसे का हिसाब कौन देगा?
नगर पालिका परिषद का संचालन जनता से प्राप्त करों और अन्य सार्वजनिक निधियों से होता है। ऐसे में प्रत्येक खरीदी में पारदर्शिता, आवश्यकता का उचित आकलन और नियमानुसार प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी है।
लगभग 2.35 लाख रुपये की रेनकोट खरीदी के मामले में भी नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि कितनी राशि खर्च की जा रही है, किस दर पर सामग्री खरीदी जा रही है, दरों का निर्धारण किस आधार पर हुआ और खरीदी से कर्मचारियों को कितना लाभ मिलेगा।
यदि प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं, यदि खरीदी नियमों के अनुरूप हुई है, तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
CMO और PIC की जवाबदेही पर सवाल
रेनकोट खरीदी की प्रक्रिया में CMO और PIC की क्या भूमिका रही, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है। PIC में प्रस्ताव किसने रखा, सदस्यों ने किन तथ्यों के आधार पर दर को स्वीकृति दी और क्या खरीदी की आवश्यकता पर विचार किया गया था?
क्या बैठक में बारिश के मौसम और खरीदी की समयसीमा को ध्यान में रखा गया था? क्या बाजार दरों की तुलना की गई थी? क्या निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किए गए थे?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीदी का निर्णय कितना उचित था और कहीं प्रक्रिया में किसी प्रकार की चूक तो नहीं हुई।
खरीदी की प्रक्रिया की जांच और पारदर्शिता की मांग
रेनकोट खरीदी के मामले में उठ रहे सवालों के बीच संबंधित अधिकारियों को खरीदी से जुड़े सभी दस्तावेजों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर सक्षम अधिकारियों से मामले की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका का निष्पक्ष परीक्षण हो सके।
यदि कार्यादेश जारी हो चुका है और खरीदी की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, तो नियमानुसार उसकी समीक्षा किए जाने की मांग भी उठ रही है। हालांकि, खरीदी पर रोक लगाने या आगे की कार्रवाई करने का निर्णय संबंधित नियमों, उपलब्ध तथ्यों और सक्षम प्राधिकारी के परीक्षण के आधार पर लिया जाना चाहिए।
अब CMO और PIC के जवाब का इंतजार
बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में लगभग 2.35 लाख रुपये की रेनकोट खरीदी को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब अब नगर पालिका प्रशासन को देना चाहिए।
5 अक्टूबर की PIC बैठक में कौन-सा प्रस्ताव रखा गया था? कार्यादेश कब जारी हुआ? खरीदी की प्रक्रिया किस स्तर पर है? और बारिश का मौसम गुजरने के बाद रेनकोट खरीदी का निर्णय क्यों लिया गया?
इन सवालों पर CMO और PIC के सदस्यों का पक्ष सामने आना जरूरी है। संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक जवाब मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
फिलहाल, दस्तावेजों के सार्वजनिक होने और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
