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बांकी मोंगरा नगर पालिका CMO का नया मामला! 1.80 लाख के जूते खरीदे, लेकिन स्वच्छता दीदियों के पैरों तक नहीं पहुंचे जूते?

by shriwashkchandra@gmail.com
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4 से 5 बार नाप लेने के बाद भी जूते का इंतजार, 208 जोड़ी जूतों की खरीदी पर उठे सवाल; रेनकोट के बाद अब जूते की खरीदी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाने की मांग

कोरबा/बांकी मोंगरा। बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में खरीदी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। इस बार मामला निकाय के कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों के लिए जूते की खरीदी से जुड़ा है। आरोप है कि नगर पालिका परिषद में स्वच्छता दीदियों और निकाय कर्मचारियों के लिए जूते खरीदने की प्रक्रिया तो पूरी कर ली गई, लेकिन जिनके लिए जूते खरीदे जाने थे, उनमें से कुछ को अब तक जूते नहीं मिले हैं। स्वच्छता दीदियों का कहना है कि उनके पैरों का नाप लेने के लिए चार से पांच बार कर्मचारी आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जूते उपलब्ध नहीं कराए गए।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जूतों की खरीदी के लिए लाखों रुपये की स्वीकृति का मामला सामने आ रहा है, तो आखिर जूते कहां हैं? क्या खरीदी गई सामग्री का वितरण हुआ है? यदि वितरण नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का जवाब नगर पालिका प्रशासन को देना चाहिए।

1.80 लाख रुपये में 208 नग जूते खरीदने का प्रस्ताव

नगर पालिका परिषद से संबंधित उपलब्ध विवरण के अनुसार, जेम पोर्टल के माध्यम से निकाय के कर्मचारियों तथा स्वच्छता दीदियों के लिए कुल 208 नग जूते खरीदने के मामले में न्यूनतम दर 1,80,000 रुपये प्राप्त होने और रायपुर की फर्म अंजानेया सेल्स को स्वीकृति देने के संबंध में विचार एवं निर्णय का विषय रखा गया था।

इस विवरण के अनुसार, 208 नग जूतों की खरीदी के लिए 1 लाख 80 हजार रुपये की राशि का उल्लेख है। लेकिन सवाल यह है कि इस खरीदी के बाद कितने कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों को जूते मिले? क्या सभी लाभार्थियों को निर्धारित माप के अनुसार जूते उपलब्ध करा दिए गए हैं? यदि जूते बांटे जा चुके हैं, तो वितरण की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? और यदि वितरण बाकी है, तो खरीदी की प्रक्रिया किस चरण में है?

इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि सरकारी धन से हुई खरीदी और उसके वास्तविक लाभार्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

चार-पांच बार नाप लिया, फिर भी जूते नहीं मिले!

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल स्वच्छता दीदियों की शिकायत से उठ रहा है। उनका कहना है कि जूते उपलब्ध कराने के लिए उनके पैरों का नाप चार से पांच बार लिया गया, लेकिन आज तक उन्हें जूते नहीं मिले।

यदि यह शिकायत सही है, तो यह केवल खरीदी का मामला नहीं, बल्कि निकाय के उन कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों के प्रति जवाबदेही का विषय भी है, जो रोजाना शहर की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाते हैं।

आखिर बार-बार नाप लेने के बावजूद जूते उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए? क्या जूतों की आपूर्ति में देरी हुई है, क्या जूते खरीदे जा चुके हैं या अभी भी प्रक्रिया अधूरी है? नगर पालिका प्रशासन को इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

रेनकोट के बाद अब जूते की खरीदी पर सवाल

बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में इससे पहले भी कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों के लिए रेनकोट की खरीदी का मामला चर्चा में आया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 5 अक्टूबर को हुई पीआईसी की बैठक में जेम पोर्टल के माध्यम से 208 नग रेनकोट की खरीदी के लिए 2,36,004 रुपये की न्यूनतम दर और निखिल ट्रेडिंग फर्म के संबंध में स्वीकृति देने का विषय रखा गया था।

रेनकोट की खरीदी को लेकर सवाल उठाया गया कि बरसात का मौसम गुजरने के बाद इस खरीदी की जरूरत और समय-सीमा पर क्या विचार किया गया था।

अब जूतों की खरीदी और उनके वितरण को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने नगर पालिका की खरीद व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, रेनकोट और जूतों की खरीदी के दस्तावेजों तथा वास्तविक वितरण की स्वतंत्र जांच के बिना किसी अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

क्या खरीदी से पहले पूरी की गई थी प्रक्रिया?

मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल खरीदी की प्रक्रिया को लेकर है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि नगर पालिका में कुछ खरीदी के मामलों में निविदा, कार्यादेश या संबंधित स्वीकृति की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं है। ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि जूतों की खरीदी के मामले में किस तारीख को मांग तैयार की गई, दरें कब प्राप्त हुईं, आपूर्ति का आदेश कब जारी हुआ, सामान कब प्राप्त हुआ और पीआईसी के समक्ष स्वीकृति का विषय कब रखा गया।

यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि 5 अक्टूबर की पीआईसी बैठक में जूतों की खरीदी से संबंधित दर की स्वीकृति का विषय किस रूप में रखा गया था और उससे पहले कोई आपूर्ति आदेश जारी हुआ था या नहीं।

यदि प्रक्रिया के किसी चरण में नियमों का पालन नहीं किया गया है, तो संबंधित दस्तावेजों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार हुई है, तो नगर पालिका प्रशासन को संबंधित दस्तावेज और वितरण की जानकारी सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप, जांच की मांग

नगर पालिका की खरीदी को लेकर कुछ लोगों द्वारा यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि सीएमओ के कार्यकाल में खरीदी के अलग-अलग मामलों में ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के तरीके अपनाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने की पुष्टि करने के लिए निविदा दस्तावेज, दरों की तुलना, कार्यादेश, आपूर्ति बिल, भुगतान और स्वीकृति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।

इसलिए जूतों और रेनकोट की खरीदी के मामलों में संबंधित दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या नहीं।

नगर पालिका प्रशासन से उठते पांच अहम सवाल

1. 208 नग जूतों की खरीदी के लिए 1,80,000 रुपये की दर के संबंध में स्वीकृति का विषय रखा गया था, तो अब तक कितने जूते प्राप्त और वितरित किए गए हैं?
2. स्वच्छता दीदियों के पैरों का चार से पांच बार नाप लेने के बावजूद जूते नहीं मिलने की शिकायत पर नगर पालिका प्रशासन क्या जवाब देगा?
3. जूतों की खरीदी का आपूर्ति आदेश कब जारी हुआ और सामान की आपूर्ति किस तारीख को की गई?
4. क्या जूतों की खरीदी, दर स्वीकृति, आपूर्ति और भुगतान से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं?
5. क्या जूतों और रेनकोट की खरीदी की स्वतंत्र जांच कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी?

अब जवाबदेही तय करने की जरूरत

नगर पालिका परिषद का दायित्व केवल सरकारी धन से सामान खरीदना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि खरीदा गया सामान निर्धारित गुणवत्ता और संख्या में प्राप्त हो तथा संबंधित कर्मचारियों तक पहुंचे।

स्वच्छता दीदियां शहर की सफाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि उनके लिए जूते खरीदे गए हैं, तो उन्हें समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

अब देखना होगा कि बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद इस मामले में क्या जवाब देती है। क्या जूतों की खरीदी और वितरण का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा? क्या स्वच्छता दीदियों को उनके जूते मिलेंगे? और क्या रेनकोट सहित अन्य खरीदी मामलों की प्रक्रिया की जांच होगी?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि जूते खरीदने के लिए राशि और फर्म का विवरण उपलब्ध है, तो जिनके लिए जूते खरीदे गए, उनके पैरों तक वे कब पहुंचेंगे?प्रकाशन से पहले जरूरी बात: यदि आपके पास पीआईसी बैठक का पूरा प्रस्ताव, जूतों की खरीदी का कार्यादेश, बिल या स्वच्छता दीदियों के बयान उपलब्ध हैं, तो उनसे खबर को और मजबूत बनाया जा सकता है। सीएमओ ज्योत्स्ना टोप्पो और संबंधित फर्म का पक्ष भी शामिल करना उचित होगा, ताकि खबर सभी पक्षों के जवाब के साथ प्रकाशित हो।

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