
कोरबा। कुशमुंडा क्षेत्र में रोजगार की मांग को लेकर भू-विस्थापितों ने रविवार सुबह SECL की कुशमुंडा खदान के भीतर पहुंचकर धरना शुरू कर दिया। भू-विस्थापितों के खदान के अंदर बैठ जाने के बाद खदान का उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति निर्मित हो गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन और घर SECL की परियोजना के लिए चले गए, लेकिन रोजगार के अवसरों में स्थानीय भू-विस्थापितों को प्राथमिकता नहीं मिल रही है।
भू-विस्थापितों का आरोप है कि जमीन हमारी गई, घर हमारे उजड़े, लेकिन ठेका मजदूरी का लाभ बाहरी लोगों को दिया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोग रोजगार के लिए भटक रहे हैं। इसी नाराजगी के चलते सुबह करीब 7 बजे बड़ी संख्या में भू-विस्थापित कुशमुंडा खदान के अंदर बैठ गए और उत्पादन बंद करा दिया।
भर्ती की पूरी सूची सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे भू-विस्थापितों ने SECL प्रबंधन और KNR ठेका कंपनी से यह जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है कि अब तक कंपनी में कितने लोगों की भर्ती की गई है, किन लोगों को रोजगार दिया गया है और कितने पदों पर भर्ती की जानी बाकी है। भू-विस्थापितों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी है तो पूरी सूची सार्वजनिक करने में प्रबंधन को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि KNR कंपनी की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई है और स्थानीय भू-विस्थापितों को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को अवसर दिए जा रहे हैं। इसे लेकर भू-विस्थापितों में काफी आक्रोश है।
SECL अधिकारियों से नहीं मिली स्पष्ट जानकारी
धरने के दौरान भू-विस्थापितों ने SECL कुशमुंडा प्रबंधन के अधिकारियों से भर्ती संबंधी पूरी सूची उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों के अनुसार अधिकारी अब तक ऐसी स्पष्ट सूची उपलब्ध कराने में सफल नहीं हुए हैं, जिसके कारण विवाद और गहरा गया।
मौके पर दीपका तहसीलदार भी पहुंचे और प्रदर्शनकारियों तथा प्रबंधन के बीच बातचीत कराने का प्रयास किया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी थी। भू-विस्थापित अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और भर्ती प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
उत्पादन बंद होने से कंपनी को नुकसान की स्थिति
खदान के भीतर उत्पादन गतिविधि प्रभावित होने से ठेका कंपनी KNR को आर्थिक नुकसान होने की स्थिति बनी है। हालांकि नुकसान की वास्तविक राशि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। भू-विस्थापितों का कहना है कि जब तक रोजगार और भर्ती से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है।
अब पूरे मामले में SECL प्रबंधन और KNR कंपनी की ओर से भर्ती प्रक्रिया, स्थानीय भू-विस्थापितों को दिए गए रोजगार तथा बाहरी लोगों की नियुक्ति के आरोपों पर क्या आधिकारिक जवाब सामने आता है, यह देखने वाली बात होगी।

