
कोरबा। सावन का पावन महीना शुरू होते ही जिले का प्रसिद्ध कनकी स्थित कनकेश्वर धाम शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां विराजमान भगवान शिव को स्वयंभू शिवलिंग माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं भगवान भोलेनाथ पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि सावन के पूरे माह प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु कनकेश्वर धाम पहुंचकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
बाबा बैजू नाथ और स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता
स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, वर्षों पहले बाबा बैजू नाथ नामक एक ग्वाला इस क्षेत्र में अपनी गायों को चराने आया करते थे। उन्होंने देखा कि उनकी एक गाय प्रतिदिन जंगल के एक ही स्थान पर जाकर अपने आप दूध बहा देती थी। इस रहस्य को जानने के लिए बाबा बैजू नाथ एक दिन गाय के पीछे-पीछे पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि गाय स्वयं एक स्थान पर अपना दूध अर्पित कर रही है। जब उस स्थान की जांच की गई तो वहां भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ। तभी से यह स्थान कनकेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध हो गया और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आने लगे।
हसदेव नदी से जल लाकर करते हैं जलाभिषेक
सावन माह में शिवभक्त बड़ी श्रद्धा के साथ हसदेव नदी से पवित्र जल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा करते हुए कनकेश्वर धाम पहुंचते हैं। भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर भक्त सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गूंज उठता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ रही भीड़
सावन के प्रत्येक सोमवार के साथ-साथ अन्य दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कनकेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। मंदिर में सुबह से देर शाम तक दर्शन और पूजा-अर्चना का सिलसिला लगातार जारी रहता है। श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय समिति एवं प्रशासन भी आवश्यक इंतजामों में जुटा रहता है।
श्रद्धालुओं की अटूट आस्था
भक्तों का विश्वास है कि कनकेश्वर धाम में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी अटूट आस्था के कारण हर वर्ष सावन माह में यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और कनकेश्वर धाम पूरे क्षेत्र में शिवभक्ति और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

