
कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा के वार्ड क्रमांक 4 स्थित तालाब के उन्नयन कार्य की निविदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लगभग 50.77 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित इस कार्य को अधोसंरचना मद से कराया जाना था। पहली निविदा प्रक्रिया में 17 निविदाकारों ने भाग लिया, जिसमें दो निविदाकारों द्वारा लगभग 25 प्रतिशत बिलो दर पर निविदा प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि एक निविदाकार द्वारा दूसरे निविदाकार को सहमति दिए जाने के बावजूद पहली निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया। इसके कुछ दिनों बाद नगर पालिका द्वारा इसी कार्य के लिए दोबारा निविदा जारी की गई।
दूसरी बार 7 निविदाकारों ने लिया हिस्सा
दूसरी निविदा प्रक्रिया में 7 निविदाकारों ने भाग लिया। आरोप है कि इनमें से 6 निविदाकारों ने अपनी निविदा वापस ले ली, जबकि एक निविदाकार को करीब 5 प्रतिशत एबव दर पर कार्य दिए जाने की बात सामने आई है।
यहीं से पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि पहली निविदा में यदि करीब 25 प्रतिशत बिलो दर उपलब्ध थी और बाद में कार्य 5 प्रतिशत एबव दर पर दिया गया, तो दोनों दरों के बीच बड़ा वित्तीय अंतर बनता है। इसी आधार पर शासन को 15 से 17 लाख रुपये तक संभावित नुकसान होने का आरोप लगाया जा रहा है।
हालांकि, वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना है, यह मूल निविदा राशि, स्वीकृत दर, तुलनात्मक विवरण और कार्यादेश की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
निविदा निरस्त करने के अधिकार पर भी सवाल
इस मामले में नगर पालिका के अभियंता राम से जब पहली निविदा निरस्त किए जाने को लेकर जानकारी ली गई तो उनके द्वारा पहले PIC सदस्य/प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल के माध्यम से निविदा निरस्त किए जाने की बात कही गई।
जब उनसे निविदा निरस्त करने के अधिकार और निर्धारित सीमा को लेकर सवाल किया गया तो बाद में उनके द्वारा सामान्य सभा में निविदा निरस्त किए जाने की बात कही गई।
अधिकारियों के जवाब में इस तरह का अंतर सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर पहली निविदा किस सक्षम प्राधिकारी ने, किस बैठक में और किस प्रस्ताव के आधार पर निरस्त की? यदि सामान्य सभा में निविदा निरस्त हुई थी तो उस बैठक की कार्यवाही और प्रस्ताव में क्या कारण दर्ज है?
CMO से सवाल, स्पष्ट जवाब का इंतजार
मामले को लेकर नगर पालिका परिषद कटघोरा के CMO मुद्रीका प्रसाद तिवारी से भी जानकारी लेने का प्रयास किया गया। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर CMO स्पष्ट जानकारी देने से बचते नजर आए।
मीडिया के सवालों से बचने के आरोपों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 50.77 लाख रुपये के इस कार्य की पहली निविदा क्यों निरस्त की गई और दूसरी निविदा में अधिक दर पर कार्य देने का आधार क्या था?
दस्तावेज सामने आए तो साफ होगी तस्वीर
पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के लिए नगर पालिका से निम्न दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ सकती है—
पहली निविदा की पूरी प्रक्रिया और तुलनात्मक विवरण
17 निविदाकारों की दरें
25 प्रतिशत बिलो निविदा से संबंधित दस्तावेज
पहली निविदा निरस्त करने का आदेश एवं कारण
PIC/सामान्य सभा की बैठक की कार्यवाही
दूसरी निविदा में शामिल 7 निविदाकारों का विवरण
छह निविदाकारों द्वारा निविदा वापस लेने से संबंधित दस्तावेज
5 प्रतिशत एबव दर पर जारी कार्यादेश
तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज
इन दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि निविदा प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता हुई।
जांच की मांग, जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
करीब 50.77 लाख रुपये के सार्वजनिक कार्य में दरों के इस अंतर को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि पहली निविदा में कम दर उपलब्ध थी और दूसरी प्रक्रिया में अधिक दर पर कार्य आवंटित हुआ, तो इसकी वजह और शासन पर पड़े वित्तीय प्रभाव की जांच जरूरी है।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है तो नगर पालिका को संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल:
25% बिलो दर वाली पहली निविदा क्यों निरस्त हुई और बाद में 5% एबव दर पर कार्य देने की नौबत क्यों आई?

CMO मुद्रीका प्रसाद तिवारी मीडिया देख कर भागने लगे और बोले मुझे BP शुगर है सुबह से मै कुछ नहीं खाया हु हाथ पैर कॉप रहा है l आपके सभी सवालों के जवाब अभियंता राम देंगे

