
कटघोरा/कोरबा। कोरबा जिले में मवेशियों की कथित तस्करी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कटघोरा थाना क्षेत्र की जड़गा पुलिस चौकी के अंतर्गत मवेशियों की खरीद-बिक्री और परिवहन की आड़ में बड़े पैमाने पर तस्करी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि जड़गा क्षेत्र के कुछ दलाल और एजेंट सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से मवेशियों को पिकअप वाहनों में भरकर मध्यप्रदेश की ओर भेजा जा रहा है।
मामले में हाल ही में कटघोरा एसडीओपी को मिली सूचना के आधार पर मवेशियों से लोड एक पिकअप वाहन को पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि उक्त वाहन मवेशियों को लेकर जमुना-कोतमा (मध्यप्रदेश) की ओर जा रहा था। वाहन में तीन लोग सवार थे। पुलिस ने पिकअप वाहन को जब्त कर मामले की जांच शुरू की है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कोरबा जिले से मध्यप्रदेश तक मवेशियों को पहुंचाने का यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय है और इसके पीछे कौन-कौन लोग काम कर रहे हैं?

पंचायत की रसीद दिखाकर परिवहन करने का आरोप
सूत्रों के अनुसार, मवेशियों की खरीद-बिक्री के नाम पर एजेंट और दलाल ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत से खरीद-बिक्री की रसीद बनवाकर मवेशियों को परिवहन करने की बात कही जाती है और यह दावा किया जाता है कि उन्हें केवल पालन-पोषण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन मवेशियों का परिवहन वास्तव में पशुपालन के उद्देश्य से किया जा रहा है या फिर इसके पीछे कोई संगठित तस्करी का नेटवर्क काम कर रहा है?
चौकी के सामने से गुजरते हैं मवेशी लोड वाहन!
जड़गा क्षेत्र को लेकर सबसे गंभीर सवाल पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि मवेशियों से भरे पिकअप वाहन जड़गा पुलिस चौकी के सामने से होकर गुजरते हैं। यदि ऐसा है तो फिर इन वाहनों की नियमित जांच क्यों नहीं होती? क्या पुलिस को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल पाती या फिर तस्करी के इस कथित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है?
एक अग्रवाल के नाम की भी चर्चा, पुराने मामलों की जांच जरूरी
इस पूरे मामले में सूत्रों के हवाले से एक अग्रवाल नामक व्यक्ति की भूमिका को लेकर भी चर्चा सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि उसके माध्यम से मवेशियों को मध्यप्रदेश भेजा जा रहा था। यह भी आरोप है कि पूर्व में जड़गा चौकी में उसके खिलाफ मवेशी चोरी और तस्करी से जुड़े मामले दर्ज हुए थे। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और वर्तमान मामले में उसकी भूमिका की जांच होना अभी बाकी है।
पुलिस की कार्रवाई से खुलेंगे कई राज?
कटघोरा एसडीओपी की सूचना पर पिकअप वाहन जब्त किए जाने के बाद अब पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। वाहन में लोड मवेशियों को कहां से खरीदा गया था? खरीद-बिक्री की रसीदें वास्तविक हैं या केवल परिवहन का आधार बनाने के लिए तैयार की गई थीं? वाहन में सवार तीनों लोगों की भूमिका क्या थी? इस कथित नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और मवेशियों को मध्यप्रदेश में कहां पहुंचाया जाना था?
इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होने पर ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी।
फिलहाल जड़गा क्षेत्र में मवेशियों के परिवहन को लेकर उठ रहे सवालों ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस केवल एक पिकअप वाहन की जब्ती तक कार्रवाई सीमित रखती है या फिर इस कथित नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचकर पूरे मामले का पर्दाफाश करती है।सुझाव: खबर को और प्रभावशाली बनाने के लिए पुलिस से यह सवाल जरूर उठाएं कि जब मवेशी लोड वाहन चौकी के सामने से गुजरने की बात सामने आ रही है, तो नियमित चेकिंग और परिवहन दस्तावेजों की जांच की व्यवस्था क्या है?


