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**कोरबा।** ऊर्जा धानी कोरबा में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (CSEB) के राखड़ डेम के रखरखाव में बरती जा रही घोर लापरवाही ने एक भीषण हादसे को अंजाम दिया है। पिछले दो महीनों में चौथी बार डेम का बांध टूटने से भारी मात्रा में राखड़ का सैलाब रिहायशी और कार्यक्षेत्र में घुस गया। इस हादसे में वहां काम कर रहा एक **JCB चालक वाहन समेत बह गया**, राखड़ में दबने से दर्दनाक मौत हो गई।

घटना का विवरण: ग्रामीणों ने खुद निकाला शव को
हादसे के वक्त मौके पर अफरा-तफरी का माहौल था। राखड़ का बहाव इतना तेज था कि जेसीबी चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, घटना के बाद CSEB के जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद रहे। अंततः ग्रामीणों ने खुद साहस दिखाया और मलबे में दबे चालक को ढूंढकर बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
राजनीतिक हस्तक्षेप और मुआवजे की मांग
घटना की सूचना मिलते ही पूर्व जनपद उपाध्यक्ष **शरबजीत सिंह** और युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष **विकास सिंह** मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया और मृतक के परिवार के लिए उचित न्याय की मांग की। नेताओं के कड़े रुख और ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए मौके पर ही मृतक के परिजनों के लिए मुआवजे की राशि तय करवाई गई।
दो महीने में चार बार फूटा डेम: संयोग या भ्रष्टाचार?

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर दो महीने के भीतर एक ही स्थान पर चार बार बांध कैसे टूट सकता है? विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने इसके पीछे निम्नलिखित गंभीर कारण बताए हैं:
1. **अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत:** आरोप है कि राखड़ बांध के मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के नाम पर आने वाले करोड़ों रुपयों का बंदरबांट किया जा रहा है। कागजों पर मरम्मत दिखाई जा रही है, जबकि धरातल पर घटिया निर्माण हो रहा है।
2. **मानकों की अनदेखी:** राखड़ डेम की दीवारों (Embankments) की मजबूती के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।

3. **ओवरलोडिंग:** डेम की क्षमता से अधिक राखड़ डंप करना भी बार-बार टूटने का एक मुख्य कारण हो सकता है।
# राखड़ बांध की संरचना और टूटने का कारण क्या
राखड़ बांध (Ash Dyke) का निर्माण बिजली संयंत्रों से निकलने वाली ‘फ्लाई ऐश’ और पानी के मिश्रण को स्टोर करने के लिए किया जाता है। यदि इसकी बाहरी दीवारें (Earth Bunds) सही ढंग से कंपैक्ट न की जाएं, तो ‘पाइपिंग’ (Piping Action) शुरू हो जाती है।
उपरोक्त सूत्र के अनुसार, जैसे-जैसे राखड़ और पानी की ऊंचाई ($h$) बढ़ती है, बांध की दीवारों पर दबाव ($P$) बढ़ता जाता है। यदि निर्माण में भ्रष्टाचार के कारण सामग्री की गुणवत्ता कम हो, तो दीवारें इस हाइड्रोस्टेटिक दबाव को झेल नहीं पातीं और ढह जाती हैं।
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ग्रामीणों में भारी आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं बल्कि **’सरकारी हत्या’** है। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद न तो ठेकेदार पर कार्रवाई की गई और न ही अधिकारियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। जिला प्रशासन से अब यह मांग की जा रही है कि दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए और राखड़ प्रबंधन की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
**निष्कर्ष:**
CSEB के राखड़ बांध का बार-बार टूटना सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। यदि अब भी प्रबंधन नहीं जागा, तो भविष्य में इससे भी बड़ी जनहानि और पर्यावरणीय क्षति से इंकार नहीं किया जा सकता।










