छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड में एमएसएमई संस्थाओं ठेकेदारों को निविदा प्रक्रिया से बाहर किए जाने एवं मेगा कॉन्ट्रैक्ट नीति लागू किए जाने के संबंध में।

हम समस्त एमएसएमई संस्थाएं/ठेकेदार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी एक की परियोजनाओं में प्रारंभ से निरंतर कार्यरत है। हम सभी लघु एवं सूक्ष्म श्रेणी की पंजीकृत एमएसएमई ठेकेदार है जिनकी आजीविका पूर्णत इन परियोजनाओं पर निर्भर है।
एक कंपनी द्वारा प्रतिवर्ष विभिन्न छोटे-छोटे कार्यों के लिए पृथक-पृथक निविदाएं जारी की जाती रही एमएसएमई प्रमाण-पत्र के आधार पर हमें भाग लेने का अवसर प्राप्त होता था। इन्हीं को हम अपने परिवारों का भरण-पोषण करते रहे हैं।

परंतु वर्तमान में कंपनी के तीनों पावर प्लांटों के मुख्य अभियंताओं द्वारा सभी छोटे-छोटे कार्यों को कर मेगा कॉन्ट्रैक्ट के रूप में निविदाएं जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे स्थानीय/ठेकेदार स्वतः निविदा प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं जबकि बड़े पूंजीपतियों,संस्थाओं / कंपनियों लाभ पहुंचाया जा रहा है। यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा प्रारंभ कौशल भारत योजना एवं एमएसएमई स्टार्टअप को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय नीति के विपरीत है। यदि यह जारी रहा तो सैकड़ों एमएसएमई / ठेकेदारों का रोजगार छिन जाएगा, आर्थिक संकट उत्पन्न होगा। परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंचेंगे पलायन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
महोदय से सविनय अनुरोध
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड में मेगा कॉन्ट्रैक्ट नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए।

एमएसएमई हित में छोटे छोटे कार्यों की निविदा प्रक्रिया पूर्ववत बहाल की जाए।
कंपनी प्रबंधक द्वारा एमएसएमई हितों के विरुद्ध लिए जा रहे निर्णयों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। स्थानीय एमएसएमई संस्थाओं, ठेकेदारों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
कंपनी के इस प्रकार के नीति से हजारों ठेकेदार बैंक अथवा बाजार से ब्याज दर पर ऋण लिये बर्बाद हो जायेगें एवं कर्ज नहीं चुका पायेंगें जिस कारण आत्म हत्या करने के शिवाय कोई विकल्प नहीं रहेगा।












