SECL बांकी मोंगरा: अधिकारियों के घर रोशन, कॉलोनी में अँधेरा; गर्मी और मच्छरों के बीच रात काटने को मजबूर कामगार
बांकी मोंगरा (कोरबा): एससीसीएल (एसईसीएल) बांकी मोंगरा क्षेत्र के कालोनियों में इस समय पसरा है अंधेरा प्रबंधन की तानाशाही और संवेदन हिंता का आलम देखने को मिल रहा है। बिजली नहीं होने कॉलोनीवासियों का जीना मुहाल कर दिया है, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह ‘अंधेरा’ पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है।

प्रमुख बिंदु:
अधिकारियों के घर गुलजार, कर्मचारी बेहाल: एक तरफ जहां पूरी तरह अंधेरा में डूबे हुआ है बांकी मोंगरा की SECL कालोनी, वहीं एसईसीएल के अधिकारियों के घर और आवास बिजली से जगमगा रहे हैं। स्ट्रीट लाइटें जल रही हैं, लेकिन कालोनी की बिजली बंद हैं।

जब कॉलोनीवासियों ने सुधार के लिए लाइन मेन को संपर्क करने की कोशिश की, तो संबंधित लाइनमैन ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया।
गर्मी और मच्छरों का दोहरा वार: मार्च की गर्मी और मच्छरों के प्रकोप से छोटे बच्चों और बुजुर्गों की हालत खराब है। बिना रोशनी के लोग रात भर जागने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगो का आरोप है कि एसईसीएल के जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को ‘मुनासिब’ ही नहीं समझ रहे हैं।
कॉलोनीवासियों का कहना है कि वे कोयला उत्पादन कर देश को रोशन करते हैं, लेकिन उनका परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर है। यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था को चालू नहीं किया गया और इस भेदभावपूर्ण ट्रांसफार्मर को बंद नहीं किया गया, तो आने वाले समय में उग्रवादी आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
“क्या एसईसीएल के नियम सिर्फ आम कर्मचारियों के लिए हैं? अगर बिजली की व्यवस्था है तो उसे अधिकारियों के घर में हीं क्यों
– एक पीड़ित निवासी












