बांकी मोंगरा | नगर पालिक परिषद के स्थानीय प्रशासन ने बांकी मोंगरा के सब्जी व्यवसाय के बीच जंग छिड़ गईं है । प्रशासन द्वारा डेली मार्केट को हटाने और उस स्थान पर अनचाहा भवन निर्माण के प्रस्ताव पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
‘जेल भेजेंगे की दी जा रही है धमकी ‘ – बाकी मोंगरा के डेली सब्जियों का दुकान लगाने वालों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें डराने-धमकाने की रणनीति अपना रहा है।
उन्हें सख्त चेतावनी दी जा रही है कि अगर बाजार नहीं हटाया गया तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।
गजरा बस्ती की जाम बाई और उनके सहयोगी के साथ हुआ था वही हाल होगा
प्रशासन द्वारा नियमों के मुताबिक तामील आदेश को हाथ में देने के बजाय, रात के अंधेरे में या गुपचुप तरीकों से नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं।
विकास या विनाश? निर्माण पर उठे सवाल
सब्जी बाजार को बांकी मोंगरा की ‘रीढ़ की हड्डी’ माना जाता है, जहां से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।
भूमिपूजन: विधायक प्रेमचंद पटेल ने उस जमीन पर भूमिपूजन किया है।
सुरक्षा का विकल्प: सड़क के दूसरी ओर प्रस्तावित नए स्थान बताए गए हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि छोटे बच्चे सड़क पार करके कैसे जाएं आँगन बाड़ी? यदि कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
एसईसीएल की एनओसी पर बड़ा सवालिया निशान
बांकी मोंगरा क्षेत्र मुख्य रूप से एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की लीज भूमि के अंतर्गत आता है।
“बांकी मोंगरा में निर्माण कार्य चल रहा है, क्या उनके लिए एसईसीएल से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किया गया है? यदि नहीं, तो इसका निर्माण वैध क्यों नहीं माना गया?”
12 मई को नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा के
प्रशासन की इस ‘एकतरफ़ा’ कार्रवाई के विरोध में सब्जी विक्रेता संघ ने आर-पार की लड़ाई को आगाज कर दिए है।
दिनांक: 12 मई
स्थान: नगर पालिका परिषद कार्यालय
मुख्य मांग: सब्जी बाजार को यथावत रखा जाए और उजाड़ने की योजना बंद हो।
भागवत विश्वकर्मा का कहना है की मै विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर गरीबों के पेट पर लात मारना और बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालना कहाँ का विकास है।
विकास की राह में ‘अपनों’ की ही रोडेबाजी; जनता के हितों की बलि…..?
शहर के आधुनिक विकास और सौन्दर्यबोध की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच एक विवाद सामने आया है। जहां एक ओर...











