शहर के आधुनिक विकास और सौन्दर्यबोध की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच एक विवाद सामने आया है। जहां एक ओर सरकार आम जनता को विश्वस्तरीय ढांचे के लिए प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर (भाजपा) के ही कुछ स्थानीय नेता अपनी सरकार की विकास कार्यों के खिलाफ मोर्चा खोल दिए है।
विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि चंद दुकान दारों के निजी स्वार्थ को साधने के लिए किया जा रहा है।
भ्रम: डेली मार्केट का सच क्या है?
पिछले कुछ दिनों से बांकी मोंगरा के ‘डेली मार्केट’ के पुनरद्धार को लेकर व्यापक स्तर पर भ्रम फैलाया जा रहा है। दुष्प्रचार द्वारा कुछ नेताओं ने डेली मार्केट यहां से छिन जाएगा बोल कर भर्मित किया जा रहा है l
डेली मार्केट को कहीं भी ‘भेजा’ नहीं जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान एक बवस्था को केवल कुछ समय के लिए पास में निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
पुनः आरंभ होने का वादा: स्पष्ट है कि डेली मार्केट तैयार होने के बाद, पुराने सभी सब्जी विक्रेता उसी स्थान पर पुनः स्थापित किया जाएगा,
विकास की राह में रोड़ा क्यों?
विपक्ष का मानना है कि कुछ स्थानीय नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए एक समूह को मोहरा बना रहे हैं। इन सभी लोगों के आर्थिक लाभ के लिए शहर की लाखों की आबादी को आधुनिक बाजार और बेहतर व्यवस्था से शुरू किया जाना है।
“यह बेहद जरूरी है कि जब सरकार विकास का खाका खींच रही है, तब पार्टी के ही कुछ लोग भ्रम और जनता को भ्रमित कर सरकार की छवि धूमिल करने में लगे हैं।”
जनता की अनदेखी
एक साधारण नागरिक की नज़र से देखें तो डेली मार्केट में समस्याओ की अम्बार है। संकरी गलियां, गंदगी और गंदगी के कारण आम जनता को भारी परेशानी होती है। सरकार की इस योजना से शहर को नई पहचान मिलनी है, ‘भ्रम का जाल’ इस प्रगति को बाधित कर रहा है।
सावधान रहने की जरूरत है
प्रशासन ने अपील की है कि नागरिकों और व्यापारियों पर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। विकास विरोधी द्वारा अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े होने की यह योजना क्या सफल हो पाएगी
वास्तव में शहर का विकास कौन चाहता है और पूरे शहर के भविष्य को लेकर कौन विकास की रहा में रोड़ा बन रहे है। विकास की इस लड़ाई में सच्चाई का साथ ही शहर का हित होगा।
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