कोरबा, पोड़ी उपरोड़ा: जहां एक ओर देश में डिजिटल क्रांति और ‘पेपरलेस’ प्रोजेक्ट का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो कि ब्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है। जिले के पोड़ी उपरोड़ा के अंतर्गत आने वाली पचरा ग्राम पंचायत के लोग अपना हक की राशन प्राप्त करने के लिए भीषण गर्मी में अग्निपरीक्षा देना पड़ रहा है।
पूरा मामला क्या है?
पचरा सोसाइटी में नेटवर्क (कनेक्टिविटी) न होने के कारण राशन के लिए ‘फिंगर प्रिंट’ (बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन) के लिए 3 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सलिहाभाटा जाना पड़ रहा है। वर्तमान पारा 41,42 डिग्री सेल्सियस के पार है, ऐसे में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप में पैदल यात्रा करने के लिए मजबूर हैं।
पहला चरण:
पहले सलिहाभाठा विक्रेता मशीन पर अपना अंगूठा (फिंगर प्रिंट) लोड करें ताकि सर्वर पर उनकी उपस्थिति दर्ज हो सके।
दूसरा चरण:
सालिहा भाठा में अंगूठा लगाने के बाद उन्हें 3 किमी दूर अपने गांव वापस पचरा आना है।
तीसरा चरण:
अंगूठा लगवाने के बाद पचरा में उन्हें चावल और अन्य राशन की दुकान दी जाती है।
लेकिन स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग के अधिकारी इस पर पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं। अधिकारी का कहना है कि उन्होंने कई बार नेटवर्क की समस्या और दूरी को लेकर शिकायत मिली है, लेकिन नतीजा सिफर आ रहा है।
“इस चिलचिलाती धूप में 3 किलोमीटर तक जाना और फिर वापस आना हमारे लिए शारीरिक और मानसिक कस्ट है । क्या सरकार हमें सुविधा दे रही है या हमारी मजबूरी का तमाशा देख रही है?” —
प्रभावित क्षेत्र: पंचायत ग्राम पचरा, पोड़ी उपरोड़ा (कोरबा)।
पचरा में नेटवर्क की अनुपलब्धता बना सिर दर्द।
सलिहाभाठा से 3 किलोमीटर तक का सफर।
भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच लंबी पैदल चलने को मजबूर
विकास की राह में ‘अपनों’ की ही रोडेबाजी; जनता के हितों की बलि…..?
शहर के आधुनिक विकास और सौन्दर्यबोध की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच एक विवाद सामने आया है। जहां एक ओर...












