कुशमुंडा पुलिस की उदासीनता -दर दर भटकती रही पीड़िता
सूत्रों के अनुसार
कहते हैं क़ानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन कोरबा के कुशमुंडा थाना के पुलिस गहरी नींद में सो गया है। महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावो की पोल खोलती यह तस्वीर ।
पिछले दो तारीख से थाने की चौखट घिस रही है, लेकिन नतीजा शून्य
2 मार्च को कुशमुंडा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। महिला संबंधी अपराधी को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के खुलासे के बावजूद, यहां पुलिस ने मामला दर्ज करना भी मुनासिब नहीं समझा।
पीड़िता को जब थाने से न्याय नहीं मिला, तो न्याय की उम्मीद पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पास से की जाती है। एसपी साहब ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मोबाइल फोन पर निर्देश दिया कि ‘एफआईआर दर्ज की जाए’। लेकिन साहब के आदेश को ठेंगे पर रख दिया गया। कुशमुंडा पुलिस को जिले के कप्तान ने भी आदेश हैl
हद तो तब हो गई, जब शाम 6 बजे से खबर लिखें जाने तक पीड़िता थाना पर बैठी रही। लेकिन थानेदार साहब अपनी कुर्सी से नदारद रहे। पुलिस की संवेदनहीनता का शिकार हो रही हैं। पीड़ता को रात 11 बजे तक थाना पर बैठे बैठे पीड़िता को चक्कर आने लगा था लेकिन कुशमुंडा थाना प्रभारी के द्वारा FIR दर्ज नहीं लिया गया था l
सूत्रों की माने तो रात बजे के बाद हुआ मामला दर्ज क्या यही है सुप्रीमकोर्ट की गाईड लाइन
पीड़िता का आरोप:-
“कुशमुंडा पुलिस की शिकायत: एसपी के आदेश के बाद भी नहीं लिखी जा रही FIR!”
“बेटियाँ सुरक्षित कैसे हैं? 2 मार्च से शिकायत देने के बाद भीं पीड़िता पुलिस का चक्कर काट रही है।”
” क्या है ये छत्तीसगढ़ पुलिस का ‘सुशासन’?”










