माननीय न्यायालयों की घोर अवमानना के दोषी छ. ग. शासन में पदासीन 5 में से 3 आई.ए.एस. अफसरों को माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय द्वारा रु. 50-50 हजार का जमानती वारंट एवं उन सभी की व्यक्तिगत-उपस्थिति हेतु आदेश जारी:
बीते कल माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय ने उक्त न्यायालय की अवमानना की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह माना कि, उत्तरवादियों की ओर से दोनों माननीय न्यायालयों के फैसलों की घोर-अवमानना कारित हुई है तथा अवमानना के 5 में से दोषी छ. ग. शासन के गृह-विभाग में पदासीन 3-आई.ए.एस. अफसरों के विरुद्ध रु. 50-50 हजार का जमानती-वारंट जारी कर उन सभी को दिनांक 04.09.2025 को समक्ष माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई के दौरान, सभी की व्यक्तिगत उपस्थिति हेतु आदेश पारित किया है।

वर्ष-2013 में छ. ग. शासन के जेल विभाग में कार्यरत 17 फार्मासिस्ट ग्रेड-2 कर्मियों द्वारा इस बात से व्यथित होकर कि, शासन के अन्य विभागों में कार्यरत फार्मासिस्ट ग्रेड-2 कर्मी उनसे ज्यादा वेतन प्राप्त कर रहे है, समक्ष माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय एक याचिका दाखिल की गयी जिसमे सुनवाई करते हुए माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की बात को सही मानते हुए 10-वर्षों बाद वर्ष-2023 उनके पक्ष में कुल 13-पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया। उक्त फैसले को चुनौती देते हुए उत्तरवादियों ने वर्ष-2024 में एक अपील समक्ष माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय की युगल-पीठ में दाखिल किया, जिसे विचारण-अयोग्य बताते हुए माननीय युगल-पीठ ने दिनांक 07.10.2024 को उत्तरवादियों की अपील ख़ारिज कर दी। उक्त वर्ष-2023 के उक्त संदर्भित फैसले पर जब शासन की और से कोई सकारात्मक कार्यपालन नहीं हुआ तब, व्यथित होकर दोबारा याचिकाकर्ताओं द्वारा अधिवक्ता प्रवीण सोनी एवं उनके सहयोगोयों (मुख्य रूप से अधिवक्तागण (श्रीमति.) विजयिता साहू, (श्रीमति.) शीतल सोनी आदि द्वारा) वर्ष-2025 में समक्ष माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय, यथास्थिति बनाये रखने के अंतरिम-आवेदन सहित न्यायालय की अवमानना (Contempt of Courts) की याचिका दाखिल की, जिसपर सुनवाई करते हुए हालांकि माननीय न्यायालय ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का हवाला देते हुए अंतरिम-आवेदन को ख़ारिज कर दिया। तदुपरांत उत्तरवादियों द्वारा मई-2025 में समक्ष माननीय सर्वोच्च न्यायालय में, माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय की युगल-पीठ के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी विचारण-अयोग्य मानते हुए ख़ारिज कर दिया था।








