आज न्यायालय में सुनवाई के दौरान उत्तरवादी अधिवक्ताओं ने बताया कि, मंत्रालय स्थित छ. ग. शासन के जेल विभाग ने दिनांक 29.08.2025 को परिवादियों के पक्ष में एक आदेश जारी कर, वर्ष-2013 में छ. ग. शासन के जेल विभाग में कार्यरत 17 फार्मासिस्ट ग्रेड-2 कर्मियों द्वारा समक्ष माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय दाखिल याचिका में माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय द्वारा 10-वर्षों बाद वर्ष-2023 में पारित कुल 13-पन्नों के विस्तृत फैसले का पालन कर दिया है।

दिनांक 18.08.2025 को माननीय न्यायालयों की घोर अवमानना के दोषी छ. ग. शासन में पदासीन 5 में से 3 आई.ए.एस. अफसरों को माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय द्वारा रु. 50-50 हजार का जमानती वारंट एवं उन सभी की व्यक्तिगत-उपस्थिति हेतु आदेश जारी किये जाने के बाद आदेश के परिपालन में आज दिनांक 04.09.2025 को तीनों आई.ए.एस. पदाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।

इसपर माननीय छ. ग. उच्च न्यायालय की एकल-खंडपीठ के माध्यम से पीठासीन अधिकारी माननीय न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच द्वारा परिवादियों को भविष्य में विषयान्तर्गत होनेवाली कमियों/शिकायतों के लिए उनका अधिकार सुरक्षित रखकर, वर्ष-2023 में पारित कुल 13-पन्नों के विस्तृत फैसले के परिपालन में जेल विभाग द्वारा इरादतन-देरी कारित करने के लिए कड़ी फटकार लगाते हुए उत्तरवादियों को आदेशित किया है कि, “आज-दिनांक से 3-माह के भीतर जेल विभाग द्वारा दिनांक 29.08.2025 को पारित आदेश को कार्यान्वित कर सभी परिवादियों के बैंक-खातों में राशि मय ब्याज-सहित (वर्ष-2006 से, प्रतिव्यक्ति जैसा लागू हो) अंतरित किया जाय।”









