लूट और मारपीट के मामले मे बांकी मोंगरा थाना पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक NL टंडन के द्वारा एक नाबालिक बालक को कटघोरा उप जेल दाखिल कराया गया
बांकी मोंगरा थाना क्षेत्र ग्राम दो नंबर के पास मेन रोड पर चार लड़के खड़े थे तभी बांकी मोंगरा निवासी दो युवक आते और उनका रास्ता रोक कर मारपीट करते है इस मारपीट के दौरान पीड़ितों का मोबाईल और गले मे पहनें चाँदी की चैन गिर जाती है l यह पूरी घटना 25 तारीख की रात 10:00 की आस पास बताई जा रही है l
दूसरे दिन बांकी मोंगरा थाना पमे पदस्थ सहायक उप निरीक्षक NL टंडन ने पूरी फुर्ती के साथ तीन आरोपीओ को सुबह लगभग दस से ग्यारह बजे घर से उठा लेते है l इन दो आरोपीयों मे से एक आरोपी नाबालिक होने के बाद भी सहायक उप निरीक्षक NL टंडन के द्वारा द्वेष पूर्ण भावना से प्रेरित होते हुए कार्रवाई कर नाबालिक को भी कटघोरा उप जेल दाखिल कराया जाता हैl
जबकि तीसरा आरोपी को लग भग एक सप्ताह बाद गिरफ्तार कर जेल दाखिल करती है
बांकी मोंगरा पुलिस की कार्य शैली पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है की लूट पाट हुई है तो बिना सामान जप्त किये कैसे जुर्म साबित होगा.जानकारी मिल रही है की अजय महंतऔर अन्य ने दो नग मोबाइल लुटा था जिसको अपने किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से शिला महंत नामक महिला के पास दोनों मोबाइल होने की बात आ रही है,लेकिन अभी तक पुलिस के द्वारा मोबाईल कहाँ है किसके पास है इस विषय पर काम नहीं कर रही हैl
विवेचना अधिकारी ASI NL टंडन ने बतलाये की आरोपी को गिरफ्तारी के समय उनके परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना दी गई उस वक्त उनके पास मात्र जच्चा बच्चा रक्षा कार्ड था (टीका करण कार्ड )जिसमे ओभर राइटिंग था l
वार्ड पार्षद पति बंशी

का कहना है की पुलिस की यह कार्यवाही बिलकुल गलत है यहाँ पर बिना दस्तावेज देखे एक नाबालिक को कटघोरा उप जेल दाखिल कराया गया जो लगभग 18 दिन से जेल सजा काट रहा है, जबकि नाबालिक को सुधार गृह भेजना था, और दूसरी बात मोबाईल किसके पासहै आरोपी की माँ का कहना है की मोबाईल किसी शिला महंत नामक महिला के पास है आखिर पुलिस इतने दिनों तक मोबाईल जप्त क्यों नहीं कर पाई जबकि लोकेशन ट्रेस कर मोबाईल की जानकारी जुटा सकती थी
अधिवक्ता अमित सिन्हा

अधिवक्ता अमित सिन्हा ने बताया की बांकी मोंगरा पुलिस के द्वारा लूट के मामले में कार्यवाही की गई है, घटना दिनांक 25 अगस्त की रात दस बजे के आस पास की है मगर बांकी मोंगरा पुलिस ने 26 अगस्त को शाम 5:31मिनट मे अपराध दर्ज करती है इससे पहले तीन आरोपीयों को उनके घर से गिरफ्तार कर थाने ले आती है l वही एक नाबालिक को बिना उम्र संबंधी दस्तावेज देखे कटघोरा उप जेल दाखिल कर देते है यह मानव अधिकारों का हनन है l नाबालिक का फोटो नाम प्रसारित करना क़ानून अपराध की श्रेणी मे आता है, बावजूद इसके पुलिस द्वारा नाबालिक की पूरी जानकारी साझा कर दी गयी है, निश्चित रूप से यह विवेचना अधिकारी के द्वारा यह पूरी तरह से द्वेष पूर्ण कार्रवाई की गई है l आरोपियों के अधिवक्ता ने माननीय न्यायालय के समक्ष इस बात का संज्ञान सामने में लाया की एक आरोपी नाबालिक है
अब आगे यह देखना होगा की इस पुरे मामले मे पुलिस के आलाधिकारी किस तरह से संज्ञान लेते हैँ. बरहाल अब देखना यह है कि माननीय न्यायालय किस प्रकार की संज्ञान लेती है









