कोयलांचल में 336 करोड़ की ‘डकैती’! PMO, CBI और ED तक पहुंची SECL महाघोटाले की फाइल, कांप उठेंगे नेता-अफसर!
- कोयले की काली जादूगरी खदान से निकला हीरा, लैब में पहुंचते ही बन गया मिट्टी! जानिए कैसे लगा देश के खजाने को ₹3.36 अरब का चूना?
- अफसरों का अजब दावा- कोयला खुद गर्म होकर अपनी क्वालिटी खराब कर लेता है, 7 साल में निजी कंपनियों को लौटाए अरबों रुपए!
- कागजों पर G4, हकीकत में धूल SECL बिलासपुर और कोरबा प्रबंधन पर संगठित वित्तीय अपराध के संगीन आरोप, सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग।
- RTI एक्टिविस्ट का धमाका SECL में थर्ड पार्टी सैंपलिंग के नाम पर ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का खेल, हिल जाएगी दिल्ली की कुर्सी!
- ₹3,36,78,21,990.88 का रिफंड घोटाला जानिए क्या है SECL का वो ग्रेड स्लिपेज खेल, जिसने अफसरों को बना दिया अरबपति?
- सरकारी खजाने पर व्हाइट कॉलर डाका! क्या SECL के CMD और तकनीकी निदेशक की शह पर लुटा देश का राजस्व? पढ़ें खोजी रिपोर्ट।
- पीएम मोदी और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र, छत्तीसगढ़ के इस कोयला घोटाले को देख जन-प्रतिनिधियों के खड़े हो जाएंगे रोंगटे!
- CBI-ED जांच की उलटी गिनती शुरू? SECL क्वालिटी मैनेजर की डैमेज कंट्रोल रिपोर्ट पर भड़के पत्रकार, सह-आरोपी बनाने की मांग।
- कोयले की दलाली में अरबों का खेल आरटीआई छुपाने के लिए केंद्रीय सूचना आयोग को भी किया गुमराह, खुल गई पोल!
कोरबा / बिलासपुर / नई दिल्ली
देश के कोयला सेक्टर से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है जो प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को हिला कर रख देगी। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी South Eastern Coalfields Limited के बिलासपुर मुख्यालय और कोरबा क्षेत्र में ₹3,36,78,21,990.88 (3 अरब 36 करोड़ से अधिक) के संगठित वित्तीय अपराध और देश के राजस्व की डकैती का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है।
एक जागरूक आरटीआई कार्यकर्ता और पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू ने सीधे भारत के प्रधान न्यायाधीश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय को पत्र लिखकर इस महाघोटाले की तत्काल जांच और जिम्मेदार शीर्ष अफसरों की गिरफ्तारी की मांग की है।
क्या है यह क्रेडिट नोट और ग्रेड स्लिपेज का खेल?
यह घोटाला सीधे तौर पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत एक गंभीर राष्ट्रीय अपराध की ओर इशारा करता है।
- दिखाया कुछ, भेजा कुछ SECL कोरबा की खदानों से कोयला प्रेषण के समय कागजों में उच्च ग्रेड (जैसे G4, G5) दिखाकर भारी-भरकम बिल बनाए जाते हैं।
- थर्ड पार्टी की एंट्री इसके बाद थर्ड पार्टी सैंपल कलेक्शन एजेंसियों की मिलीभगत से जानबूझकर कोयले की गुणवत्ता को गिरा हुआ घोषित कर दिया जाता है।
- अरबों का रिफंड गुणवत्ता गिरने का बहाना बनाकर वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2023-24 के बीच कुल 3.36 अरब से अधिक की शुद्ध राशि बिलासपुर मुख्यालय से प्रोसेस कराकर चुनिंदा निजी घरानों को वापस लौटा दी गई।
अफसरों का हास्यास्पद तर्क कोयला खुद को खराब कर लेता है
जब यह मामला CPGRAMS के जरिए PMO पहुंचा, तो कोरबा के Area Quality Manager ने 1 जून 2026 को एक ऐसी तकनीकी रिपोर्ट पेश की जिसे देखकर किसी का भी सिर चकरा जाए। रिपोर्ट में कहा गया कि कोयले में खुद गर्म होने की प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है, जिससे उसकी गुणवत्ता कम हो जाती है, इसलिए इसे वित्तीय अनियमितता नहीं माना जा सकता!
इस रिपोर्ट के खिलाफ शिकायतकर्ता ने दोबारा 9 जुलाई 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह रिपोर्ट सिर्फ बिलासपुर मुख्यालय और खुद के प्रबंधन को बचाने का एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। यदि 7 साल से यह समस्या थी, तो क्वालिटी मैनेजर ने सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए? उन्हें भी इस घोटाले में सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस महाघोटाले को दबाने के लिए आरटीआई आवेदनों के तहत मांगी गई वित्तीय जानकारियों को जानबूझकर छुपाया जा रहा है और केंद्रीय सूचना आयोग को गुमराह कर पारदर्शिता अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
क्या सरकार करेगी ये 3 बड़ी कार्रवाइयां?
अब गेंद भारत सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के पाले में है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि, - तत्काल FIR दर्ज कर SECL बिलासपुर मुख्यालय के तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक , तकनीकी निदेशक व कोरबा के जिम्मेदार अधिकारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ हो।
- पिछले 7 वर्षों में जारी किए गए सभी क्रेडिट नोट्स और रिफंड फाइलों का विशेष फॉरेंसिक ऑडिट हो।
- माननीय सर्वोच्च न्यायालय और बिलासपुर हाई कोर्ट देश के राजस्व की इस खुली डकैती पर स्वतः संज्ञान लेकर समयबद्ध जांच सुनिश्चित कराएं।