कोरबा जिले के बांकी मोंगरा की सुबह की घटना है माता पिता अपने बच्चों का भविष्य को सावरने के लिए अच्छे से अच्छा स्कूल मे दाखिला करते है l माता सुबह जल्दी उठ कर अपने बच्चों के नास्ता बनाती है, और स्कूल भेजनें की तैयारी मे जुट जाती है l मगर बस स्टेण्ड मे इंतिजार करते की बस कब आएगी मगर पता चलता है की बस नहीं आ रही है l

पिता बच्चे को स्कूल छोड़े या काम पर जाए
SECL कोयला खदान के प्रभावित या SECL कर्मी सभी काम पर जाते है l और SECL कार्मिओ को सुविधा के लिए टेंडर जारी करता है और किसी एक कम्पनी को यह कार्य दिया जाता है ताकि उनके बच्चों को समय पर स्कूल पहुंच जाए और घर वापस छोड़ जाए मगर यहाँ पर विपरीत है l क्योंकि अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने जाए या काम पर जाए अगर छोड़ने नहीं जाते है तो बच्चे की स्कूल मे अनुपस्थित दर्ज होती है l
राजधानी बस ठेकेदार की मनमानी

स्थानीय लोगो का कहना है की राजधानी बस संचालक की मनमानी की खमियाजा भुगतना पद रहा है जबकि समय पर SECL के द्वारा बिल का भुकतान कर दिया जाता है लेकिन डीजल नहीं होने के नाम चालक बस को खड़ी कर दे रहे है l
राजधानी बस के मैनेजर कहते अपने पैसे से डीजल डलवा लों

राजधानी स्कूल बस के चालकों ने बताया की आए दिन डीजल के नाम पर रोना रहता है अनेको बार ऐसा हुआ है की हम अपने पैसे से डीजल डलवा कर बच्चों को स्कूल गए है l
SECL नहीं लगा पा रहा अंकुश ठेकेदार की मनमानी पर
SECL सूराकछार के अधिकारी राजधानी बस के ठेकेदार पर अंकुश नहीं लगा पा रहे है इसलिए उनकी मनमानी चल रही है हमेशा डीजल का रोना रहता है इसमें स्कूली बच्चों की क्या गलती है SECL के अधिकारी आखिर अंकुश क्यों नहीं लगा पा रहे है क्या ठेकेदार SECL के अधिकारिओ को कुछ कमीशन देते है l
आखिर कौन है जिम्मेदार
स्कूल जाने के लिए निकले बच्चे समय पर बस नहीं आती चालक कहते है डीजल नहीं है….. एक बढा सवाल आखिर जिम्मेदार कौन
1 बस चालक
2 बस का ठेकेदार
3 SECL के जिम्मेदार अधिकारी
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